Saturday, 7 May 2016

Panchatantra Krist Ki - Tasvir E Salgirah- The Birthday Pic





शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ

Penned By Narayan-Chandra Rauf

गोद में ढाये श्याम को है मगर नज़र नहीं आती
बादलों से लिपटी चन्द्र चकोरी नज़र नहीं आती

जी रहे हैं कैसे जानने की कोशिश है कभी
कानो पे उड़कर उनकी खबर नहीं आती

यूँ तो तस्वीर ऐ सालगिरह का इंतेज़ार है लेकिन
जहाँ तक नज़र जाये नज़र नहीं आती

इसी उम्मीद मे डूबे डूबे खोए खोए से  रेह्ते है
अब तो होश ओ खिरद दो दो पहर नहीं आती

 ये दरखुवास्ते इल्लतिजाये रऊफ सताती  है
कभी उनको रहम मुझपर मेहज नहीं आती

Monday, 25 April 2016

सुर्खी - The Headline




Penned By Narayan-Chandra Rauf

शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ 

ज़िक्र उसका कल दोस्तों में था 
वो रूह-ऐ -माहताब सुर्खियों में था 
मचल रहे थे ऐब में डूबे हुए मिज़ाज़  
चर्चा उसका जो दुश्मनो  में था 

पूछ रहा था मुझे यह क्या हुआ कैसे  हुआ 
चाँद रात का सुबह हैरतो में था 

कश लगायी मैंने भी खुशियों की बेशुमार 
एक नाम धुंदला मेरा परस्तारो में था 

वो कैसी चमक थी की आँख उसके कारे हुए 
सिहाई का रंग मानो नूर के धारो में था 

ढूढ़ता निकल पड़ा हर गली हर चौराहों में 
खरीदने अख़बार बिकता बाज़ारों में था 

Note: Chamak here means camera flash ...

Monday, 18 April 2016

खुदा करे - God Bless!


Penned By: Narayan-Chandra Rauf

शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ

ये दिल हर दम यही खुदा से दुआ करे
वो दिन न आए तुमसे मुझे कोई जुदा  करे

ले दे के रह गया एक रिश्ता  मेरा तुम्हारा
न टूट जाये यह पुरकैफ अज़ीज़ खुदा करे

आकर आपके बाहों मे चैन आए नींद आए
न जगाये कोई अब मुझे ख्वाब से खुदा करे

इल्तिजा बस इतनी की दिल किसी का "रऊफ"
न टूटे न रोए याद मे किसी की खुदा करे

Thursday, 7 April 2016

मिलन - The Urge


























Penned By Narayan-Chandra Rauf

शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ

तुझसे मिलने को दिल दुआ करे
वो वक़्त अभी आए खुदा करे

सीने में दर्द है कोई न दवा करे
आके लगाए वह मरहम खुदा  करे

इश्क़ हैं मोहबत्त हैं कोई मजाक नहीं
फैसला जल्द न हो कोई खुदा करे

इस दुख का कोई दवा नहीं होता
वह मुझसे जुदा न हो खुदा करे

कुछ ऐसा कर जाऊं उस के लिए "रउफ"
के फक्र से सबराह हर रोज़ उठा करे

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Sunday, 3 April 2016

माइका - The Maternal Home


Penned By Narayan-Chandra Rauf

शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ 

यह क्या एक-ब-एक हो गया किस्सा शोख
जितना देखो उसे वो प्यारी लागे
रहने आई है दो-चार दिन माइके
बिहाई नहीं अब कवारी लागे

चले जा रही अकेली न डर न फ़िक्र कोई
के साया उसको अब पस-ए-दीवार लागे
ज़िन्दगी के हर एक पल हर एक लम्हा
उसको अब दमकदार लागे

देखने में तो परी "रऊफ" बड़ी अच्छी लागे
अब्र पे जैसे चाँदनी इक शहकार लागे
रोशनी छेड़ रही है  उजालों के खूतूत
सितारें अब उसके सामने बेकार लागे

(Incomplete)



Reason for the poem

Women look most happiest & beautiful when they r @ maternal home ... and so is the case with my ‪#‎love‬ ... recently she was in #Chennai

Don't miss an opportunity to know my personality ... my story ... about my book Chandini - You Are All My Reasons ...

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Wednesday, 16 March 2016

#Surge Musings: तोहफा - The Gift

























शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ

दो दिलो के सिरे यूँ ही तो नहीं सिलते
जोड़ना उनको है तोहफों से नहीं जुड़ते

कन्ने मेरे रहेगा तोहफा तेरे नाम का
हुदूद किसी को न देने की नहीं हिलते

ये कैसे भाग मेरे करमो से चिपके है
मुहोब्बत के दिये मेरे नहीं जलते

निहारो न तुम आँखों को  मेरे सामने
के बुझाने से उमंगें नहीं बुझते

चिकते कैसे यह लिबास में  है दागे
मिटाने की कोशिश है नहीं मिटते

गिरते ज़ुल्फ़ों की बात क्या कहिये
गूंथने पर दिल से नहीं गिरते

किस्सा मेरा उसका बस इतना है "रऊफ"
दो दरिया के किनारे है जो नहीं मिलते



Friday, 11 March 2016

#VijayMallya Case Musings: Libas-Al-Kitab

Deeksha Seth in Lovely Half Sleeves Blue T-Shirt and Black Denim UHQ Pics Must see Penned By Narayan-Chandra Rauf

शायर: नारायण-चन्द्र रऊफ

मेरे सवाल का जवाब मेरे सामने था
कल हुस्न-ए -माहताब मेरे सामने था

खुली किताब थी बयाँ हो रही थी आशिकी
पढ़ रहे थे लोग नया बाब मेरे सामने था

मुस्कान उनकी बचा ले गयी मुझे वर्ना
आबजू सामने सैलाब मेरे  सामने था

किसी और नाज़नीन पे नज़र क्यों जाये
माबूद मेरा माहताब मेरे सामने था

नीले काले लिबास पहने खड़ा वो सामने था
जैसे लिबास-अल-किताब मेरा सामने था